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Saturday, August 22, 2020

Thandi Thandi Lyrics by Gulzaar Chhaniwala

Thandi Thandi Lyrics by Gulzaar Chhaniwala is Latest Haryanvi song sung and composed by Gulzaar Chhaniwala while Thandi Thandi song lyrics also written by Gulzaar Chhaniwala and the video of Thandi Thandi is also directed by him.

Thandi Thandi Lyrics by Gulzaar Chhaniwala

Oh Uttarakhand Ki Pahadiyan Mein Jisa Lage Se
Aa Gaya Main London Mein Manne Isa Lage Se
Uttarakhand Ki Pahadiyan Mein Jisa Lage Se
Aa Gaya Main London Mein Manne Isa Lage Se

Parvati Maiya Tane Parnam
Duja Roop Se Chandi Re
Savan Maheena Lag Rehya
Baarish Thandi Thandi Re

Arey Ya Jo Chamak Chamak
Gange Maiya Beh Rahi
Chalave Bholenath Se Mera

Ho Re Ya Duniya Toh Marke Ne Raaji
Bachave Bholenath Se Mera
Ho Re Ya Duniya Toh Marke Ne Raaji
Bachave Bholenath Se Mera

Bachave Bholenath Se Mera
Bulave Bholenaath Se Mera

Haan Besak Gareeb Se Halaat Baba Ji
Par Chota Sa Ek Shivling Toh Le Jaunga
Choriyan Te Kade Love Letter Na Diye
Par Bhole Tanne Jaan Bhi Main De Jaunga

Choriya Te Kade Love Letter Na Diye
Par Bhole Tanne Jaan Bhi Main De Jaunga

Ho Ye Jo Bam Bam Karde Babam Bam Babam
Bam Bam Karde Kawadiye Se Nache
Nachave Bholenath Se Mera

Ho Gaam Te Si Chale Yaar 4 Ek Gaddi Mein
Koye Tohve Naukari Koyi Chori Aali Biyadi Mein
Ek Helicopter Leyau Main
Baaki To Ban Sab Kaaj Gaye
Bajrang Bali Bhi Nach Rahe
Ayodhya Ram Viraj Gaye
Bajrang Bali Bhi Nach Rahe
Ayodhya Ram Viraj Gaye

Baba Majak Ki 100 Baat Hai
Par Is Kalje Mein Tu He Tha Tu Ae Se
Arr Tu Ae Rahvega Bakiya Ne
Ram Ram!

Bachave Bholenath Se Mera
Oh Sare Soche Se Re Chaaniwala Gave
Gawave Bholenath Se Mera
Re Ya Duniya To Marke Ne Raaji
Bachave Bholenath Se Mera

Bachave Bholenath Se Mera
Bulave Bhole Hmm..

Download Mp3 Song "Thandi Thandi - Gulzaar Chhaniwala 320 Kbs" 


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श्रीगणेश चतुर्थी 2020 : राशि अनुसार यह मंत्र है शुभ आपके लिए...

श्रीगणेश चतुर्थी 2020 : राशि अनुसार यह मंत्र है शुभ आपके लिए...


श्रीगणेश चतुर्थी की पूजा दोपहर के मुहूर्त में की जाती है क्योंकि श्रीगणेश का जन्म दोपहर में हुआ था।

इस बार 22 अगस्त 2020, शनिवार के दिन श्रीगणपति देव की पूजा के लिए दोपहर में 02 घंटे 36 मिनट का समय है।

हम दिन में 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट के मध्य विघ्नहर्ता विनायक की पूजा कर सकते हैं।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की निर्विघ्न जीवन प्रदान करते हैं। आइए हम सब भगवान गजानन की आराधना कर सुखी,सुरक्षित और समृद्ध जीवन की कामना करें। जानें राशिनुसार कौन-सा मंत्र जपना शुभ है आपके लिए-

राशिनुसार श्री गणेश जी की आराधना

मेष- ॐ अवनीश नमः।

वृषभ- ॐ गजवक्र नमः।

मिथुन- ॐ कीर्ति नमः।

कर्क- ॐ दुर्जा नम:।

सिहं- ॐ नमस्थेतू नम:।

कन्या- ॐ अवनीश नम:।

तुला- ॐ गजकर्ण नम:।

वृश्चिक- ॐ विकट नम:।

धनु- ॐ यशस्कर नम:।

मकर- ॐ यंजकाय नम:।

कुंभ- ॐ विश्वराजा नम:

मीन- ॐ शशि-वर्णम नम:।



श्री शनि देव जी

श्री शनि देव जी



श्री शनि चालीसा



दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥



जयति जयति शनिदेव दयाला।

करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।

माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला।

टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।

हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।

पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।

यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।

भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।

रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत।

तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।

कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई।

मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।

मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति-मति बौराई।

रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका।

बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।

चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी।

हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो।

तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों।

तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।

आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी।

भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।

पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा।

नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।

बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो।

युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।

लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई।

रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना।

जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी।

सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।

हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा।

सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।

मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।

चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा।

स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।

धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी।

स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै।

कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।

करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।

विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।

दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।

शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥



दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

श्री शनि आरती 



जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

जय जय श्री शनि देव....



श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टि चतुर्भुजा धारी।

नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

जय जय श्री शनि देव....



क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

जय जय श्री शनि देव....



मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

जय जय श्री शनि देव....



देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।

श्री गणेश भजन - जय गणेश देवा (Jai Ganesh Deva )

श्री गणेश भजन 

जय गणेश देवा ( Jai Ganesh Deva) - विनोद राठौर 


घर में पधारो गजानंद जी मेरे घर में पधारो ( Ghar Mein Padharo Gajanan Ji )


घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo रिद्धि सिद्धि लेके Riddhi Siddhi Leke आ गणराजा Aa Ganaraja मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo रिद्धि सिद्धि लेके Riddhi Siddhi Leke आ गणराजा Aa Ganaraja मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo घर में पधारो घर में पधारो घर में पधारो Ghar Mein Padharo Ghar Mein Padharo Ghar Mein Padharo घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo राम जी आना Ram Ji Aana लक्ष्मण जी आना Lakshman Ji Aana राम जी आना Ram Ji Aana लक्ष्मण जी आना Lakshman Ji Aana संग में लाना सीता मैया Sang Mein Lana Sita Maiya मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo ब्रम्हा जी आना Bramha Ji Aana विष्णु जी आना Vishnu Ji Aana ब्रम्हा जी आना Bramha Ji Aana विष्णु जी आना Vishnu Ji Aana भोले शंकर जी ले आना Bhole Shashankar Ji Le Aana मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo लक्ष्मी जी आना Lakshmi Ji Aana गौरी जी आना Gauri Ji Aana लक्ष्मी जी आना Lakshmi Ji Aana गौरी जी आना Gauri Ji Aana सरस्वती मैया को ले आना Saraswati Maiya Ko Le Aana मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo विघन को हरना Vighan Ko Haarana मंगल करना Mangal Karana विघन को हरना Vighan Ko Haarana मंगल करना Mangal Karana कारज शुभ कर जाना Karaj Shubh Kar Jana मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo घर में पधारो गजाननजी Ghar Mein Padharo Gajananji मेरे घर में पधारो Mere Ghar Mein Padharo



Friday, August 21, 2020

मंत्र: श्री गणेश - वक्रतुण्ड महाकाय (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok)

मंत्र: श्री गणेश - वक्रतुण्ड महाकाय ( Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok)

Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok

किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने के पूर्व श्री गणेश जी का स्मरण इस मंत्र के साथ अवश्य करना चाहिए, आपके शुभकार्य निश्चित ही सिद्ध होंगे।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

हिन्दी रूपांतरण:
वक्रतुण्ड: घुमावदार सूंड
महाकाय: महा काया, विशाल शरीर
सूर्यकोटि: सूर्य के समान
समप्रभ: महान प्रतिभाशाली
निर्विघ्नं: बिना विघ्न
कुरु: पूरे करें
मे: मेरे
देव: प्रभु
सर्वकार्येषु: सारे कार्य
सर्वदा: हमेशा, सदैव

घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।
मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करें (करने की कृपा करें)॥

॥ दोहा ॥
जय गणपति सदगुण सदन,
कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मंगल करण,
जय जय गिरिजालाल ॥

॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति गणराजू ।
मंगल भरण करण शुभः काजू ॥

जै गजबदन सदन सुखदाता ।
विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥

राजत मणि मुक्तन उर माला ।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।
चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।
गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।
मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।
अति शुची पावन मंगलकारी ॥

एक समय गिरिराज कुमारी ।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥ 10 ॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥

अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।
बिना गर्भ धारण यहि काला ॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।
पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥

अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।
पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा ।
देखन भी आये शनि राजा ॥ 20 ॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।
बालक, देखन चाहत नाहीं ॥

गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥

कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥

हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।
काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो ।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥

चले षडानन, भरमि भुलाई ।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।
शेष सहसमुख सके न गाई ॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥

अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥

॥ दोहा ॥
श्री गणेश यह चालीसा,
पाठ करै कर ध्यान ।
नित नव मंगल गृह बसै,
लहे जगत सन्मान ॥

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,
ऋषि पंचमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो,
मंगल मूर्ती गणेश ॥

Shri Ganesh Ji Chalisa in En

आरती: श्री गणेश जी (Shri Ganesh Ji Aarti In Hindi )



गणेश उत्सव मे सर्वमान्य श्री गणेश आरती का अपना अलग ही महत्व है:

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

----- Additional -----
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥